गणतंत्र दिवस 26 जनवरी : जानिए क्यों चुनी गई ये तारीख़ और कौन होगें इसबार के मुख्य अतिथि?

देश इस साल अपना 76 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, जिसको लेकर लेकर शहरों और गाँवों में तैयारियाँ जोरों पर हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर परेड होती है, महामहिम राष्ट्रपति के हाथों झंडा रोहण होता है और अलग-अलग राज्यों की झाँकी निकाली जाती है। इनके अलावा सड़कों और बादलों की फ़िज़ाओं में सैन्य शक्ति प्रदर्शन का अद्भुत नज़ारा भी देखने को मिलता है। जिसे देखकर सभी के दिल में देश भक्ति हिलोरे मारने लगती है। कर्तव्य पथ का यह नजारा देखते ही बनता है। जिसका देशवासियों को बेसब्री से इन्तेज़ार रहता है। हर साल वार्षिक आयोजन 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है। जिससे भारत एक सम्प्रभु व लोकतांत्रिक गणराज्य वाला राष्ट्र बनता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि संविधान से बढ़कर कुछ भी नहीं है, चाहे वह विधायिका हो, कार्यपालिका हो या न्यायपालिका। संविधान में हर महत्वपूर्ण पहलू का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जिनसे हर आम इंसान भी ख़ास हो जाता है। जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी सत्ता के दहलीज़ तक पहुँचने का अधिकार देता है। यह दिन हर उस हिंदुस्तानियों के लिए खास है, जो संविधान में विश्वास रखते हैं। जो लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ जीना चाहते हैं। इस बार का गणतंत्र दिवस (Republic Day 2025) कई मायनों में खास होने वाला है. लेकिन क्या आप जानते हैं, गणतंत्र दिवस के लिए 26 जनवरी को ही क्यों चुना गया? और इस बार के गणतंत्र दिवस पर कौन होंगे मुख्य अतिथि? आइये इस आर्टिकल के जरिए इन सवालों के जवाब ढ़ूढ़ने की कोशिश करते हैं।

गणतंत्र दिवस के पीछे का इतिहास
हर साल गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान को लागू किए जाने के याद में मनाया जाता है। हमारे देश को स्वतंत्रता तो 15 अगस्त 1947 को ही मिल गई थी, लेकिन उस वक़्त तक हमारे देश के पास अपना कोई संविधान नहीं था। बल्कि भारत सरकार मुख्य रूप से भारत सरकार अधिनियम 1935 पर आधारित कानूनों से चलती थी। जिसको अंग्रजी हुकूमत ने तैयार किया था। फिर 29 अगस्त 1947 को हमारे देश में स्वतंत्रत संविधान बनाने के लिए डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में मसौदा समिति का गठन किया गया। इस समिति में के. एम मुंशी, मुहम्मद सादुल्लाह, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, एन माधव राव, एल मित्तर जैसे डी. पी खेतान बड़े चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद देश का अपना संविधान बनना शुरू हुआ। 2 साल 11 महीने 18 दिन में तैयार हुए भारतीय संविधान को 26 नवम्बर 1949 को देश की संविधान सभा ने स्वीकार किया। फिर अगले साल 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में संविधान लागू कर दिया गया। संविधान के निर्माण में उस वक़्त करीब 64 लाख रुपये का खर्च आया था। जिनके मूल प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से उकेरा था। जिसमें करीब 6 महीने का समय लगा था।

26 जनवरी को ही क्यों चुना गया ?
26 जनवरी की तारीख इसलिए चुनी गई. क्योंकि इसी दिन कॉंग्रेस ने 1930 में भारत की पूरी आजादी की घोषणा की थी। क्योंकि इतिहास के पन्नों में ये दिन राष्ट्रीय गौरव के पर्याय के रूप दर्ज है। जिसे उस समय के कॉंग्रेस के सभी बड़े नेता यादों की दुनिया में इस दिन को विशेष दिन के रूप में अमर देखना चाहते थे। कॉंग्रेस ने अपने लाहौर सत्र के दौरान 26 जनवरी 1930 को ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने का निर्णय लिया, जिसमें सभी भारतीयों से इसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आग्रह भी किया गया। एक और बात इसी सत्र में पहली बार देश में तिरंगा को लहराया गया था। ऐसे में पूर्ण स्वराज के प्रस्ताव के लागू होने के दिन को याद रखते हुए 26 जनवरी को संविधान लागू करने का निर्णय लिया गया। जिसके लागू होने के साथ ही देश को पूर्ण गणतंत्र घोषित कर दिया गया। ये वो समय था जब देश उपनिवेश से एक स्वतन्त्र और गणतंत्र राष्ट्र के सफ़र को पूरा कर रहा था। इसलिए ही हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

इस बार कौन होगा मुख्य अतिथि ?

हर साल गणतंत्र दिवस के मौके किसी ना किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है। सिर्फ कोरोना महामारी के दौरान 2021 और 2022 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसी राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया जा सका था। गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के आमंत्रण और सेवा सत्कार की तैयारी 6 महीने पहले से शुरू हो जाती है। इस साल इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर वो 25 और 26 जनवरी को दो दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत आयेंगे। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच कई द्विपक्षीय वार्तें भी होंगे। गणतंत्र दिवस के मौके पर आने वाले राजकीय मेहमान कई औपचारिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। हर साल मुख्य अतिथि के निमंत्रण में विदेश मंत्रालय के तरफ से कई बिन्दुओं पर गहन विचार किया जाता है, इसमें सबसे पहले खासकर उस देश और भारत के बीच संबंधों का ध्यान रखा जाता है। देखा जाता है कि उस देश के साथ राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था का क्या और कितना कनेक्शन है। इनके अलावा इन पहलुओं पर भी विचार किया जाता है कहीं किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष को निमंत्रण देने से दूसरे देश के साथ रिश्ते खराब ना हो जाए। जो कि विदेश मंत्रालय के लिए आसान नहीं होता है। यही वज़ह है कि इनकी तैयारी कई महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती है।

जानिए कौन थे पहले गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि ?

26 जनवरी 1950 को मनाए जाने वाले पहले गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो शामिल हुए थे। इस साल फिर से 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को ही मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होने के बाद ही देश को पहला राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र के रूप में मिला। उन्होंने राष्ट्रपति की शपथ लेते हुए दिल्ली के पुराने किले के सामने बने इरविन स्टेडियम में पहली बार गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया था। जिसको अब मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और अंतिम गवर्नर जनरल रहे सी. राजगोपालाचारी भी मौजूद रहे थे। वही पहले गणतंत्र दिवस के परेड में देश के 3 हज़ार वीर जवानों और 100 विमानों ने हिस्सा लिया था। यह दिन हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से सुदृढ़ करने का अवसर होगा।

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