नई दिल्ली: पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर विवाद संसद के बजट सत्र का सबसे महातपूर्ण मुद्दा बन गया है। यह विवाद 2 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) पर चर्चा चल रही थी। नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी को जनरल नरवणे की किताब से कुछ अंश पढ़ने नहीं दिया गया। किताब का एक अंश द कारवां मैगजीन ने फरवरी इडिशन में छापी हैं, जिसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद के दौरान चीनी घुसपैठ और सरकार की कथित नाकामी का जिक्र है।
राहुल गांधी ने पुर्व आर्मी चीफ की किताब का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर निर्णायक और गंभीर स्थिति में सेना का साथ न देने का आरोप लगाया, भाजपा के वरिष्ठ नेता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अप्रकाशित और बिना प्रमाणित दस्तावेज से संसद में पढ़ना नियमों का उल्लंघन है, खासकर नियम 349 के तहत। स्पीकर ओम बिरला ने कई बार हस्तक्षेप किया और हंगामे के बीच सदन स्थगित करना पड़ा।
मंगलवार 3 फरवरी को भी विवाद जारी रहा, सदन बार-बार स्थगित हुआ और 8 विपक्षी सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया। बुधवार 4 फरवरी को राहुल गांधी ने संसद के बाहर किताब की प्रिंटेड कॉपी दिखाई और मुद्दा को फिर उठाया। उन्होंने ने मीडिया से बात चीत करते हुए कहा कि पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वो डरे हुए हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते।
जैसा मैंने कहा, पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वो डरे हुए हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते। pic.twitter.com/1d2UmvR9mz
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 4, 2026
2020 भारत-चीन LAC विवाद का संदर्भ
विवाद की जड़ 2020 की पूर्वी लद्दाख के LAC चीन के साथ झड़प की जुड़ी हुई हैं। मई 2020 की शुरुआत में चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में LAC पर तेजी से सैनिक बढ़ाए और बुनियादी ढांचा बनाया। भारत ने भी बड़ी संख्या में सैनिक और हथियार भेजे। मई की शुरुआत में पांगोंग त्सो झील के पास और सिक्किम के नाकु ला इलाके में दोनों पक्षों में झड़प हुई। लद्दाख में 70 से ज्यादा भारतीय जवान घायल हुए। स्थानीय स्तर पर बातचीत से कुछ झड़पें सुलझीं, लेकिन तनाव बना रहा।
15 जून की रात को गलवान घाटी में भयंकर हाथापाई हुई। 20 भारतीय जवान शहीद हो गए, जिनमें कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू भी थे। दोनों तरफ लोहे की रॉड, कांटेदार तार वाले डंडे और पत्थर जैसे हथियार इस्तेमाल हुए। भारतीय सैनिकों ने चीनी कैंप हटाने की कोशिश की थी, जिसके बाद यह लड़ाई हुई।
चीन ने अपने सैनिकों के हताहतों का आंकड़ा कभी नहीं बताया, लेकिन अनुमान 40 से ज्यादा के हैं। इसके बाद दोनों सेनाओं ने हजारों अतिरिक्त सैनिक और भारी हथियार तैनात किए। कई महीनों तक सैन्य और राजनयिक बातचीत चली। आखिरकार अक्टूबर 2024 में दोनों पक्ष बाकी बचे सभी विवादित इलाकों (डीपसांग मैदान और डेमचोक समेत) से पीछे हटने पर सहमत हुए।
द कारवां ने किताब से क्या छापा?
फरवरी 2026 में द कारवां मैगजीन ने जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का एक अंश छापा। इसमें 31 अगस्त 2020 की रात की घटना का विस्तार से जिक्र है।
रात करीब 8:15 बजे नॉर्दर्न कमांड चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने नरवणे को फोन किया। उन्होंने बताया कि चार चीनी टैंक पैदल सैनिकों के साथ रेचिन ला की तरफ बढ़ रहे हैं। ये टैंक भारतीय जवानों की पोजीशन से सिर्फ कुछ सौ मीटर दूर थे। भारतीयों ने उसी दिन सुबह कैलाश रेंज पर तेजी से कब्जा किया था—यह ऊंचाई रणनीतिक रूप से बहुत अहम है।
भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के लिए रोशनी का गोला दागा, लेकिन चीनी आगे बढ़ते रहे। स्थिति गंभीर होते देख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की और पूछा, “मेरे लिए क्या आदेश हैं?”
नरवणे ने लिखा है कि ” मुझे आदेश दिया गया कि बिना “टॉप लेवल” की अनुमति के फायरिंग नहीं करनी है। व्यक्त गुजर रहा था फिर भी कोई साफ निर्देश नहीं आया। 9:10 बजे जोशी ने फिर फोन किया कि चीनी टैंक अब रेचिन ला से एक किलोमीटर से भी कम दूर पर है । 9:25 बजे नरवणे ने फिर रक्षा मंत्री से साफ दिशा-निर्देश मांगे, लेकिन कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला।
किताब क्यों नहीं छप पाई?
जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अभी भी रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है। किताब 2023 में जमा की गई थी और अप्रैल 2024 में पेंगुइन रैंडम हाउस से छपने वाली थी, लेकिन प्री-ऑर्डर हट गए और अब तक कोई रिलीज डेट नहीं आई है।
राहुल गांधी का दावा है कि किताब भारत में छपने नहीं दी जा रही है, जबकि विदेश में उपलब्ध है (हालांकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं है)।
आज अगर प्रधानमंत्री संसद में आते हैं, तो मैं उन्हें एक किताब भेंट करूंगा।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 4, 2026
यह किताब किसी विपक्षी नेता की नहीं है।
यह किताब किसी विदेशी लेखक की नहीं है।
यह किताब है देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की – और हैरानी की बात यह है कि यह किताब कैबिनेट मंत्रियों के हिसाब से मौजूद ही… pic.twitter.com/xKzh0wPdni
रिटायर्ड आर्मी अधिकारियों को किताब छापने से पहले रक्षा मंत्रालय, आर्मी हेडक्वार्टर और विदेश मंत्रालय की मंजूरी लेनी होती है। यह आर्मी रूल्स 1954 और पेंशन नियमों के तहत जरूरी है, ताकि गोपनीय जानकारी न लीक हो।
नरवणे ने खुद अक्टूबर 2025 में खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में कहा था, “मेरा काम किताब लिखकर पब्लिशर को देना था। मंजूरी लेना पब्लिशर का काम था। अब एक साल से ज्यादा हो गया है, अभी भी रिव्यू चल रहा है।”
किताब में नरवणे ने अपनी पूरी करियर की बात की है—सिक्किम में चीन से पुरानी मुठभेड़ें, पाकिस्तान के साथ LoC मैनेजमेंट, 2020 लद्दाख संकट (गलवान और रेचिन ला), और रक्षा नीतियों पर अपनी राय।
विपक्ष का हमला
विपक्ष ने सरकार पर किताब दबाने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने संसद में कहा, “इसमें क्या है जो इन्हें इतना डरा रहा है? अगर डर नहीं है तो मुझे पढ़ने दो।”
संसद के बाहर पत्रकारों से उन्होंने कहा: “नरवणे ने लद्दाख की पूरी घटना लिखी है। जब आर्मी चीफ ने राजनाथ सिंह को फोन किया कि चीनी टैंक कैलाश रेंज तक पहुंच गए हैं, तो क्या करें? पहले राजनाथ सिंह ने जवाब नहीं दिया। फिर जयशंकर, NSA और राजनाथ सिंह से बात की, लेकिन कोई जवाब नहीं। दोबारा राजनाथ सिंह को फोन किया तो उन्होंने कहा—‘टॉप’ से पूछता हूं। टॉप का स्टैंडिंग ऑर्डर था कि चीनी आएं तो बिना परमिशन फायर मत करो। सेना उन टैंकों पर फायर करना चाहती थी क्योंकि वे हमारी जमीन पर थे। मोदी ने मैसेज दिया—‘जो उचित समझो वो करो’। यानी मोदी ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया, उन्होंने आर्मी चीफ से कहा कि ‘मेरे बस की नहीं है’। मैं अकेला महसूस कर रहा था, पूरी व्यवस्था ने मुझे छोड़ दिया।”
पूर्व सेना प्रमुख का बयान उजागर कर देगा कि मोदी जी और राजनाथ जी ने सेना को कैसे निराश किया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 2, 2026
अपने पर्दाफ़ाश के डर से वो मुझे संसद में बोलने नहीं दे रहे। pic.twitter.com/RfznNHSLmx
विपक्ष ने कहा कि सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। निशिकांत दुबे ने भी किताब के अंश पढ़े, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार का पक्ष
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “हम दो दिन इंतजार करते रहे। बाकी सदस्यों को भी बोलने का हक है। मनमाने ढंग से नहीं बोला जा सकता। यह भारत की संसद है, नियमों के अनुसार बोलिए।”
भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा: “राहुल गांधी ने फिर से संसदीय विशेषाधिकार का दुरुपयोग करके सेना को बदनाम करने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाने की कोशिश की है। यह नई बात नहीं है।”
सरकार का कहना है कि किताब अभी मंजूरी के अधीन है, भारत में आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। 2020 में सेना को पूरी छूट दी गई थी, किसी गोली चलाए बिना बिना क्षेत्र हारे स्थिति संभाली गई। विपक्ष की चुनिंदा उद्धरण सेना का मनोबल गिराने की कोशिश है। यह पूरा मामला संसदीय नियमों का पालन बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच का विवाद बन गया है।













