भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को उनकी उत्कृष्ट, समर्पित और राष्ट्रहित में की गई उल्लेखनीय सेवाओं के लिए विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके पेशेवर कौशल, रणनीतिक सोच और देश के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, कर्नल कुरैशी ने अपने सेवाकाल में कई महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है, जिनमें आतंकवाद के विरुद्ध भारत की प्रभावी रणनीति को सुदृढ़ करना प्रमुख रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। इस अभियान के तहत उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया और पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तथ्यों के साथ उजागर करने में अहम योगदान दिया। उनकी स्पष्ट, शांत और सटीक संवाद शैली ने भारत की स्थिति को वैश्विक समुदाय के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने में मदद की।
कर्नल सोफिया कुरैशी ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) से कमीशन प्राप्त किया था। वे अपनी रणनीतिक समझ, सिग्नल इंटेलिजेंस में दक्षता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं। सैन्य नेतृत्व के बीच उन्हें एक ऐसी अधिकारी के रूप में सम्मान मिलता है, जो कठिन हालात में भी सूझबूझ और अनुशासन के साथ मिशन को अंजाम तक पहुंचाती हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में कर्नल सोफिया कुरैशी ने इतिहास रचते हुए एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया था। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की महत्वपूर्ण मील का पत्थर रही, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता का भी प्रतीक बनी।
सेना और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नल कुरैशी को मिला यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह सफर साहस, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है। विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित होकर कर्नल सोफिया कुरैशी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय सेना में प्रतिभा और समर्पण को सर्वोच्च मान्यता दी जाती है।













