केजरीवाल की VVIP पंजाब यात्रा पर उठे सवाल, विपक्ष ने बताया ‘अय्याशी’

मो० नैयर आज़म

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के निशाने पर हैं. दरअसल उन्हें निशाना इसलिए बनाया गया क्योंकि वो दर्जनों गाड़ियों का काफिला लेकर पिछले दिनों पंजाब पहुंचे.

5 मार्च को केजरीवाल अपने परिवार के साथ 10 दिनों के लिए पंजाब के आनंदगढ़ स्थित विपश्यना केंद्र पहुंचे. इस दौरान उनके काफिले में तीन दर्जन से ज्यादा गाड़िययां थी. 100 से ज्यादा पंजाब पुलिस के जवान थे. साथ में जैमर, एंबुलेंस और कमांडो की सुरक्षा से लैश काफिला था. केजरीवाल पर ये सवाल इसलिए उठा, क्योंकि वो और उनकी पार्टी दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार चुकी है. फ़िलहाल वो किसी संवैधानिक पद पर नहीं है। लेकिन उनका काफिला किसी VVIP से कम नहीं था. इसी को लेकर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि ‘मैं इसे अय्याशी कहूंगा’,  वहीं बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा ‘टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल केजरीवाल की विपश्यना के लिए क्यों किया जा रहा है!’ जबकि आप नेता इसपर बात करने से मना कर दिया है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम आए हुए एक महीने से ज्यादा हो गए हैं. भारतीय जनता पार्टी की 27 साल बाद सत्ता में वापसी हुई है. वहीं दिल्ली की सत्ता में करीब 11 साल बाद परिवर्तन हुआ है. इससे पहले लगातार तीन बार से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही थी. अभी फिलहाल रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में सरकार का गठन हो चूका है.

2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम में बीजेपी को 70 में से 48 सीटों पर जीत मिली. वहीं आप महज 22 सीटों पर सिमटकर रह गई. कांग्रेस का पिछले दो बार की तरह इस बार भी खाता नहीं खुला. हालांकि वोट प्रतिशत में आप और बीजेपी  के बीच बड़ा अंतर नहीं दिखा. बीजेपी को 45.57 प्रतिशत और आप को 43.57 प्रतिशत वोट मिला. जबकि साल 2020 के विधानसभा चुनाव के परिणाम में आप को 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं बीजेपी महज 8 सीटें जीत पाई थी. आप का वोट प्रतिशत 53.57 प्रतिशत था. वहीं बीजेपी का 39.77 प्रतिशत था.

इस हार के बाद सियासी गलियारों में ये कयास लगाई जा रही है कि आप का भविष्य खतरे में हैं. क्योंकि पार्टी ने अपनी मूल जमीन दिल्ली की सत्ता गवां दी है. इसपर विकसित समाज अध्ययन केंद्र (CSDS) में लोकनीति के प्रोफेसर और चुनावी राजनीति पर शोध कर रहे संजय कुमार कहते हैं ‘आप का मुश्किल दौर शुरू हो चूका है. पहली बात उनके पास सत्ता नहीं है और दूसरा ये कि उनकी टॉप लीडरशिप चुनाव हार चुकी है. ऐसे में ये मुश्किल तब और बढ़ जाएगा जब कहीं केजरीवाल या सिसोदिया कथित शराब घोटाले में दोषी पाए जाते हैं. 22 प्लस केजरीवाल का बहुत पॉजिटिव असर होता. लेकिन 25 प्लस विदआउट केजरीवाल का उतना असर नहीं होगा’.

पेशे से वकील, केजरीवाल सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुके और फ़िलहाल कांग्रेस के नेता राजेंद्र पाल गौतम कहते हैं ‘आप का कोई भविष्य नहीं है. वजह यह है कि आप के पास कोई अपनी विचारधारा नहीं है. वो हिंदुत्वा और मनुस्मृति के विचारों को मानती है. जिस विचारधारा को पहले से बीजेपी मानती आ रही है. बीजेपी के सामने इस विचारधारा के साथ कोई आगे बढ़ ही नहीं सकता. समाजवादी पार्टी और राष्ट्रिय जनता दल जैसी सेक्युलर पार्टी कांग्रेस के सामने इसलिए बढ़ी क्योंकि कांग्रेस अपने राह से कुछ समय के लिए भटक गई थी और इन पार्टियों की विचारधारा सामाजिक न्याय, समतावादी और संविधानवादी है’.

अब क्या करेंगे केजरीवाल या उन्हें क्या करना चाहिए! इस सवाल के जवाब में संजय कहते हैं ‘लगता नहीं कि वो राज्यसभा, लोकसभा या विधानसभा जाने की कोशिश करेंगे. दो साल में पंजाब में विधानसभा चुनाव है. ऐसे में उन्हें संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केन्द्रित करनी चाहिए. केजरीवाल को धैर्य रखनी चाहिए. केजरीवाल को अपने असली मूल पर लौट आना चाहिए. जिस सोच के साथ वो राजनीति में आए थे’.

 दिल्ली चुनाव में आप की हार को लेकर संजय का कहना है कि ‘आप ने पिछले चुनाव में जो वादे किए थें, उनमे से बहुत कम पूरा कर पाए. आखिरी का दो साल आप के लिए काफी बुरा रहा. केजरीवाल के छवि पर शराब घोटाला और भ्रष्टाचार का आरोप लगा. जिससे उनके सत्ता विरोधी लहर का माहौल बना. आप ने मुस्लिम और दलित के मुद्दे को लगातार नजरंदाज किया. कोरोना के समय तबलीगी जमात के खिलाफ बयान दिया. दिल्ली दंगे पर चुप्पी बरती. जबकि बीजेपी ने इस चुनाव में साम, दाम, दंड और भेद सब लगा दिया’.

आप के हार में कांग्रेस भी ज़िम्मेदार है! इस बात को संजय सिरे से नकारते हुए कहते हैं ‘जितना आप की जीत के लिए उनको श्रेय गया, हार के लिए उतना ही वो जिम्मेदार हैं. आप ने लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन तोड़ लिया! इसपर गौतम कहते हैं ‘कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है. बीजेपी को हराने के लिए आप कांग्रेस को नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं’.

पूर्व विधायक और AAP नेता दुर्गेश पाठक इन सारे सवालों और आरोपों पर कहते हैं कि ‘चुनाव में हार जीत होती रहती है. ये हमारे लिए थोड़ा मुश्किल समय है. दिल्ली की जनता ने चाहा तो हम वापसी करेंगे’. चुनाव हार की वजह पर उनका कहना है कि ‘हम सिर्फ दो प्रतिशत वोट के कमी के कारण चुनाव हारे. वजह बड़े पैमाने पर वोटिंग लिस्ट से दिल्ली के वोटरों का नाम हटाया गया. पैसे बांटे गए. लोकतंत्र का मजाक बनाया गया. मीडिया ने इसको दिखाया नहीं’.

इस चुनाव परिणाम के बाद आप के भविष्य पर सवाल उठने की एक वजह ये भी है कि आप के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद नई दिल्ली विधानसभा सीट पर चुनाव हार गए. पार्टी में दुसरे सबसे बड़े नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जंगपुरा सीट पर चुनाव हार गए. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन शकूर बस्ती सीट पर चुनाव हार गए. पार्टी के राष्ट्रिय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सौरभ भरद्वाज ग्रेटर कैलाश सीट पर चुनाव हार गए. मुख्यमंत्री आतिशी को छोड़कर लगभग आप के सभी बड़े नेता चुनाव हार गए हैं.

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